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सैलरी का सही इस्तेमाल कैसे करें? 50-30-20 नियम से बनेगा फाइनेंस का मास्टर!

जानें 50-30-20 नियम के जरिए कैसे अपने पैसों को सही तरीके से बाँटें। ज़रूरत, शौक और बचत का सही संतुलन बनाकर वित्तीय सुरक्षा पाएं।

प्रकाशित: 28 अग॰ 2025
पढ़ने का समय: 7 min read
विशेषज्ञ समीक्षा
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सम्पूर्ण निवेश गाइड

समझदारी से निवेश निर्णय लेने के लिए पूरी जानकारी और सुझाव

नमस्ते दोस्तों! अगर आप कभी सोचते हैं कि आपकी मेहनत की कमाई और लंबा कैसे चले—चाहे आप बेंगलुरु के टेक प्रोफेशनल हों, कानपुर के टीचर हों या मुंबई में छोटे व्यापारी—तो 50-30-20 नियम आपके लिए एकदम सही है।
यह आसान सा तरीका आपकी आय को तीन हिस्सों में बाँटता है—ज़रूरतें, शौक, और बचत—ताकि आप आज भी अच्छा जीवन जी सकें और कल के लिए भी सुरक्षित रहें।

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मैं खुद पिछले 10 साल से पैसों को मैनेज कर रहा हूँ (और कई बार दिवाली शॉपिंग में बजट बिगड़ने के बाद सीखा भी!), इसलिए आज आपको उदाहरणों के साथ यह नियम समझाने जा रहा हूँ।


50-30-20 नियम क्या है?

यह नियम आपकी टैक्स के बाद की आय को तीन हिस्सों में बाँटने की सलाह देता है:

  • 50% ज़रूरतें (Needs) – जैसे किराया, EMI, राशन, बिजली-पानी बिल।
  • 30% शौक (Wants) – जैसे घूमना-फिरना, बाहर खाना, नए कपड़े या गैजेट।
  • 20% बचत व कर्ज चुकाना (Savings & Debt Repayment) – जैसे PPF, म्यूचुअल फंड, या लोन की EMI।

यानी पैसा कहाँ जा रहा है, यह क्लियर और बैलेंस्ड हो जाता है। खासकर भारत में जहाँ EMI, त्योहारों का खर्च और परिवार की जिम्मेदारियाँ आम हैं।


स्टेप 1: टैक्स के बाद की आय निकालें

सबसे पहले अपनी नेट सैलरी पता करें—यानी PF और TDS कटने के बाद आपको हर महीने हाथ में कितनी सैलरी मिलती है।

मान लीजिए, प्रिय्या नाम की एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर है जो हैदराबाद में काम करती है और हर महीने ₹80,000 घर लाती है।

अब 50-30-20 नियम ऐसे लागू होगा:

  • 50% ज़रूरतें: ₹40,000
  • 30% शौक: ₹24,000
  • 20% बचत/कर्ज: ₹16,000

स्टेप 2: 50% ज़रूरतें – बेसिक खर्चे

प्रिय्या का ज़रूरी खर्च इस तरह है:

  • किराया/EMI: ₹18,000 (1BHK फ्लैट, हैदराबाद)
  • राशन: ₹6,000 (दाल, चावल, सब्जियाँ, D-Mart से महीने भर का सामान)
  • बिजली-पानी-नेट: ₹3,000
  • आवागमन: ₹4,000 (ओला/ऑटो या पेट्रोल)
  • माता-पिता को मदद: ₹5,000 (लखनऊ में रहने वाले माता-पिता के लिए)
  • इंश्योरेंस प्रीमियम: ₹4,000

👉 कुल: ₹40,000 (यानी 50%)

छोटा टिप: अगर ज़रूरी खर्च 50% से ज़्यादा हो रहा है, तो कुछ एडजस्ट करें। जैसे प्रिय्या ने Wi-Fi का प्लान जियो पर स्विच करके ₹500 बचाए।


स्टेप 3: 30% शौक – लाइफ का मज़ा

“शौक” वो चीजें हैं जो ज़िंदगी को एंजॉयेबल बनाती हैं लेकिन अनिवार्य नहीं होतीं।

  • बाहर खाना: ₹6,000 (वीकेंड पर बिरयानी या Starbucks कॉफी)
  • मनोरंजन: ₹3,000 (Netflix, Spotify, मूवी टिकट)
  • शॉपिंग: ₹8,000 (FabIndia से नया कुर्ता या त्योहार की खरीदारी)
  • घूमना-फिरना: ₹7,000 (गोवा ट्रिप या छोटी ट्रैवल प्लानिंग)

👉 कुल: ₹24,000 (30%)

उदाहरण: पिछले साल प्रिय्या ने iPhone पर ज्यादा खर्च कर दिया जिससे उसकी बचत कम हो गई। अब वह IRCTC पर ट्रेन टिकट पहले से बुक करके सस्ते में ट्रैवल करती है।


स्टेप 4: 20% बचत और कर्ज चुकाना – फ्यूचर सिक्योरिटी

अब बारी है बचत और फाइनेंशियल सिक्योरिटी की। प्रिय्या हर महीने ऐसे करती है:

  • आपातकालीन फंड: ₹5,000 (Zerodha से लिक्विड म्यूचुअल फंड में)
  • रिटायरमेंट बचत: ₹5,000 (PPF अकाउंट में टैक्स बेनिफिट के लिए)
  • कर्ज चुकाना: ₹6,000 (टू-व्हीलर EMI)

👉 कुल: ₹16,000 (20%)

📊 क्यों जरूरी है? RBI की 2024 की रिपोर्ट बताती है कि सिर्फ 27% भारतीयों के पास इमरजेंसी फंड है। छोटे से शुरुआत करें—₹1,000 भी बचाना बड़ी आदत बना सकता है।


क्यों यह नियम भारतियों के लिए कारगर है?

  • मेट्रो शहरों में हाई EMI या किराया हो,
  • छोटे शहरों में माता-पिता की जिम्मेदारी हो,
  • या बच्चों की पढ़ाई के लिए बचत करनी हो,

हर स्थिति में यह नियम बैलेंस बनाने में मदद करता है। और सबसे खास—आय बदलने पर आसानी से एडजस्ट किया जा सकता है।


चुनौतियाँ और समाधान

  • महंगे शहरों में किराया ज्यादा: मुंबई में किराया 40% तक चला जाता है। ऐसे में शौक को 20% और बचत को 10% कर दीजिए।
  • अनियमित आय: फ्रीलांसर हैं तो 3 महीने की औसत आय निकालकर बजट बनाइए। Razorpay जैसी ऐप मदद करती है।
  • परिवारिक जिम्मेदारी: भाई-बहन/माता-पिता की मदद को “Needs” में गिनिए, लेकिन बचत भी जरूर रखिए।

असल उदाहरण: मेरा दोस्त रोहन, दिल्ली का ग्राफिक डिज़ाइनर, जिसकी इनकम अनियमित थी। उसने हर प्रोजेक्ट की पेमेंट का 20% फिक्स्ड डिपॉज़िट में डालना शुरू किया। एक साल में ₹50,000 का इमरजेंसी फंड बन गया!


अंतिम विचार

50-30-20 नियम आपके पैसों को अनुशासन में लाने का आसान और असरदार तरीका है। मैंने खुद इसी से बहन की शादी के लिए बचत की, शिमला की ट्रिप भी एंजॉय की और रिटायरमेंट की तैयारी भी कर रहा हूँ।

👉 बस एक महीने इसे आजमाइए। खर्च लिखिए—Walnut जैसी ऐप या साधारण Excel शीट से। यकीन मानिए, आपके पैसों पर कंट्रोल बढ़ जाएगा।


डिस्क्लेमर: यह पोस्ट सामान्य वित्तीय सलाह पर आधारित है। पर्सनल सलाह के लिए किसी सर्टिफाइड फाइनेंशियल प्लानर से संपर्क करें।

यह गाइड केवल शैक्षिक जानकारी प्रदान करता है। निवेश से पहले किसी वित्तीय सलाहकार से परामर्श अवश्य करें।

क्या यह उपयोगी था?

लेखक

अंकित वर्मा

अंकित वर्मा

अंकित वर्मा मुंबई स्थित एक वित्तीय सलाहकार हैं, जिन्हें 10 साल का अनुभव है। उन्होंने हजारों भारतीयों को वित्तीय स्वतंत्रता हासिल करने में मदद की है और वह चाहते हैं कि पैसा मैनेज करना सबके लिए आसान हो—चाहे आप नौकरीपेशा हों या छोटे बिज़नेस चलाते हों।

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